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ramayan 7.61.24: हे बल और पराक्रम से संपन्न भगवान राम! हमने आपके समक्ष जो भय उत्पन्न हुआ है, उसका कारण बता दिया है। आप उसे दूर करने में समर्थ हैं, अतः आप हमारी इच्छा पूर्ण करें।॥24॥   |   ramayan सर्ग 7.61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.61.24 
इति राम निवेदितं तु ते
भयजं कारणमुत्थितं च यत्।
विनिवारयितुं भवान् क्षम:
कुरु तं काममहीनविक्रम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे बल और पराक्रम से संपन्न भगवान राम! हमने आपके समक्ष जो भय उत्पन्न हुआ है, उसका कारण बता दिया है। आप उसे दूर करने में समर्थ हैं, अतः आप हमारी इच्छा पूर्ण करें।॥24॥
 
‘O Lord Rama, endowed with power and valour! We have presented to you the reason for the fear that has arisen before us. You are capable of removing it, so please fulfil our desire.’॥ 24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकषष्टितम: सर्ग: ॥ ६ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें इकसठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ १॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)