श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.61.2 
तथा ब्रुवति काकुत्स्थे भार्गवो वाक्यमब्रवीत्।
भयानां शृणु यन्मूलं देशस्य च नरेश्वर॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी की यह बात सुनकर भृगुपुत्र च्यवन बोले, 'हे मनुष्यों! समस्त देश और हम लोगों पर जो भय छा गया है, उसका मूल कारण सुनिए।
 
On hearing Sri Raghunath say this, Bhrigu's son Chyavan said, 'Lord of men! Listen to the root cause of the fear that has descended upon the entire country and us.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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