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श्लोक 7.61.18  |
तं पुत्रं दुर्विनीतं तु दृष्ट्वा क्रोधसमन्वित:।
मधु: स शोकमापेदे न चैनं किंचिदब्रवीत्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| मधु ने जब अपने पुत्र को उद्दण्ड होते देखा, तो वह क्रोध से जल उठा। उसे अपने पुत्र की दुष्टता देखकर बड़ा दुःख हुआ, परन्तु उसने उससे कुछ नहीं कहा।॥18॥ |
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| Madhu was seething with anger when he saw his son being unruly. He was very saddened to see his son's wickedness, but he did not say anything to him.॥ 18॥ |
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