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ramayan 7.61.17: उसका पुत्र महाबली लवण है, जो अत्यन्त उग्र स्वभाव का है। वह दुष्टात्मा बचपन से ही पापकर्मों में लिप्त रहा है॥17॥   |   ramayan सर्ग 7.61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.61.17 
तस्या: पुत्रो महावीर्यो लवणो नाम दारुण:।
बाल्यात्प्रभृति दुष्टात्मा पापान्येव समाचरत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसका पुत्र महाबली लवण है, जो अत्यन्त उग्र स्वभाव का है। वह दुष्टात्मा बचपन से ही पापकर्मों में लिप्त रहा है॥17॥
 
‘His son is the mighty Lavana, who has a very fierce temperament. That evil soul has been involved in sinful activities since childhood.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)