श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.61.15 
एवं मधुर्वरं लब्ध्वा देवात् सुमहदद्भुतम्।
भवनं सोऽसुरश्रेष्ठ: कारयामास सुप्रभम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी से ऐसा अद्भुत वर पाकर श्रेष्ठ दैत्य मधु ने एक सुन्दर भवन बनाया, जो अत्यन्त प्रकाशमान था ॥15॥
 
Having received such a wonderful boon from Mahadevji, Madhu, the best demon, built a beautiful building, which was very luminous. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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