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ramayan 7.61.14: “जब तक यह भाला आपके पुत्र के हाथ में रहेगा, तब तक वह समस्त प्राणियों के लिए अजेय रहेगा।” ॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.61.14 
यावत् करस्थ: शूलोऽयं भविष्यति सुतस्य ते।
अवध्य: सर्वभूतानां शूलहस्तो भविष्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
“जब तक यह भाला आपके पुत्र के हाथ में रहेगा, तब तक वह समस्त प्राणियों के लिए अजेय रहेगा।” ॥14॥
 
“So long as this spear remains in your son’s hand, he will remain invincible for all creatures.” ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)