श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.61.13 
मा भूत् ते विफला वाणी मत्प्रसादकृता शुभा।
भवत: पुत्रमेकं तु शूलमेतद् भविष्यति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"परन्तु जो अच्छे वचन तुमने मुझे प्रसन्न जानकर कहे हैं, वे व्यर्थ न जाएं; इसलिए मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि यह भाला तुम्हारे एक पुत्र के पास रहेगा।
 
"But the good words that have come out of your mouth knowing that I am pleased, should not go in vain; therefore I grant you the boon that this spear will remain with one of your sons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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