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श्लोक 7.61.10  |
एवं रुद्राद् वरं लब्ध्वा भूय एव महासुर:।
प्रणिपत्य महादेवं वाक्यमेतदुवाच ह॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान रुद्र से ऐसा वर पाकर उसने महादैत्य महादेवजी को प्रणाम किया और फिर इस प्रकार कहा-॥10॥ |
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| “After receiving such a boon from Lord Rudra, he bowed to the great demon Mahadevji and then said thus – ॥ 10॥ |
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