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श्लोक 7.61.1  |
ब्रुवद्भिरेवमृषिभि: काकुत्स्थो वाक्यमब्रवीत्।
किं कार्यं ब्रूत मुनयो भयं तावदपैतु व:॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसा कहकर ऋषियों की प्रेरणा से श्री रामचन्द्रजी बोले - 'महर्षिओ! कहिए, मुझे आपका कौन-सा कार्य सम्पन्न करना है! अब तक तो आपका भय दूर हो जाना चाहिए।'॥1॥ |
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| Having said this, inspired by the sages, Shri Ramchandraji said - 'Maharishis! Tell me, which of your tasks do I have to accomplish! Your fear should go away by now.'॥ 1॥ |
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