श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम के दरबार में च्यवन आदि ऋषियों का शुभागमन, श्रीराम के द्वारा उनका सत्कार करके उनके अभीष्ट कार्य को पूर्ण करने की प्रतिज्ञा तथा ऋषियों द्वारा उनकी प्रशंसा  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  7.60.9-10 
प्रतिगृह्य तु तत् सर्वं राम: प्रीतिपुरस्कृत:॥ ९॥
तीर्थोदकानि सर्वाणि फलानि विविधानि च।
उवाच च महाबाहु: सर्वानेव महामुनीन्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाबली श्री रामचन्द्रजी ने बड़ी प्रसन्नता से उन समस्त दानों, पवित्र जल और नाना प्रकार के फलों को ग्रहण किया और उन समस्त महर्षियों से कहा -॥9-10॥
 
With great pleasure, the powerful Sri Rama took all those gifts, the holy water and various kinds of fruits, and said to all those great sages -॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)