श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम के दरबार में च्यवन आदि ऋषियों का शुभागमन, श्रीराम के द्वारा उनका सत्कार करके उनके अभीष्ट कार्य को पूर्ण करने की प्रतिज्ञा तथा ऋषियों द्वारा उनकी प्रशंसा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.60.18 
त्वया पुनर्ब्राह्मणगौरवादियं
कृता प्रतिज्ञा ह्यनवेक्ष्य कारणम्।
ततश्च कर्ता ह्यसि नात्र संशयो
महाभयात् त्रातुमृषींस्त्वमर्हसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परंतु आपने हमारे आने का कारण जाने बिना ही, केवल ब्राह्मणों के आदर के कारण ही हमारा कार्य करने का वचन दिया है; अतः इसमें संदेह नहीं कि आप अवश्य ही यह कार्य कर सकेंगे। आप ही ऋषियों को महान भय से बचा सकेंगे॥18॥
 
‘But you have pledged to do our work without knowing the reason for our arrival, just out of respect for Brahmins; therefore, there is no doubt that you will definitely be able to do this work. Only you will be able to save the sages from the great fear.’॥ 18॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे षष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें साठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ०॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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