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श्लोक 7.60.18  |
त्वया पुनर्ब्राह्मणगौरवादियं
कृता प्रतिज्ञा ह्यनवेक्ष्य कारणम्।
ततश्च कर्ता ह्यसि नात्र संशयो
महाभयात् त्रातुमृषींस्त्वमर्हसि॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| परंतु आपने हमारे आने का कारण जाने बिना ही, केवल ब्राह्मणों के आदर के कारण ही हमारा कार्य करने का वचन दिया है; अतः इसमें संदेह नहीं कि आप अवश्य ही यह कार्य कर सकेंगे। आप ही ऋषियों को महान भय से बचा सकेंगे॥18॥ |
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| ‘But you have pledged to do our work without knowing the reason for our arrival, just out of respect for Brahmins; therefore, there is no doubt that you will definitely be able to do this work. Only you will be able to save the sages from the great fear.’॥ 18॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे षष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें साठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ०॥ |
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