श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम के दरबार में च्यवन आदि ऋषियों का शुभागमन, श्रीराम के द्वारा उनका सत्कार करके उनके अभीष्ट कार्य को पूर्ण करने की प्रतिज्ञा तथा ऋषियों द्वारा उनकी प्रशंसा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.60.17 
बहव: पार्थिवा राजन्नतिक्रान्ता महाबला:।
कार्यस्य गौरवं मत्वा प्रतिज्ञां नाभ्यरोचयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हम लोग अनेक महाबली राजाओं के पास गए; परंतु उन्होंने उस कार्य का महत्व समझकर और सुनकर भी उस कार्य को करने की प्रतिज्ञा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई॥17॥
 
O King! We went to many mighty kings; but even after understanding the significance of the task and hearing about it, they did not show any interest in taking the pledge that they would do it.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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