श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  7.6.57-58h 
कपोता रक्तपादाश्च सारिका विद्रुता ययु:॥ ५७॥
काका वाश्यन्ति तत्रैव विडाला वै द्विपादय:।
 
 
अनुवाद
कबूतर, तोता और मैना लंका छोड़कर भाग गए। कौवे वहीं काँव-काँव करने लगे। बिल्लियाँ भी वहीं गुर्राने लगीं और हाथी आदि पशु चिंघाड़ने लगे।
 
The pigeon, the parrot and the myna left Lanka and ran away. The crows started cawing there itself. The cats also started growling there and animals like elephants started wailing. 57 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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