श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.6.39 
तत: सुमाली माली च श्रुत्वा माल्यवतो वच:।
ऊचतुर्भ्रातरं ज्येष्ठमश्विनाविव वासवम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
माल्यवान की यह बात सुनकर सुमाली और माली अपने बड़े भाई से इस प्रकार बोले, मानो अश्विनी के दोनों पुत्र देवताओं के राजा इन्द्र से बातें कर रहे हों।
 
Hearing these words of Malyavan, Sumali and Mali spoke to their elder brother in the same manner as if the two sons of the Ashwini were conversing with Indra, the king of the gods.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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