श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.6.37 
सर्वै: क्रतुशतैरिष्टं सर्वे मायाविदस्तथा।
सर्वे सर्वास्त्रकुशला: सर्वे शत्रुभयंकरा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'उन सभी राक्षसों ने सैकड़ों यज्ञ किए थे। वे सभी जादू-टोना जानते थे। वे सभी अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे और शत्रुओं के लिए भयंकर थे।
 
‘All those demons had performed hundreds of sacrifices. All of them knew the magic. All of them were skilled in all the weapons and were dreadful for the enemies.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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