श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.6.33 
देवानां भयभीतानां हरिणा राक्षसर्षभौ।
प्रतिज्ञातो वधोऽस्माकं चिन्त्यतां यदिह क्षमम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘राक्षसमुखों! इस प्रकार भयभीत देवताओं के सामने श्रीहरि ने हम लोगों को मार डालने की प्रतिज्ञा की है; अतः अब हमें इस विषय में अपने उचित कर्तव्य का विचार करना चाहिए ॥33॥
 
‘Monster heads! Thus, in front of the frightened gods, Shri Hari has vowed to kill us; Therefore, now we should think about the right duty for us in this matter. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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