श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.6.31 
हरादवाप्य ते मन्त्रं कामारिमभिवाद्य च।
नारायणालयं प्राप्य तस्मै सर्वं न्यवेदयन्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर से यह उपदेश पाकर वह कामों का नाश करने वाले महादेवजी को प्रणाम करके भगवान नारायण के धाम गया और उनसे सब बातें कह सुनाई॥31॥
 
After receiving this advice from Lord Shankar, he bowed to Mahadevji, the destroyer of lust, and went to the abode of Lord Narayana, where he narrated everything to him.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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