श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.6.30 
योऽसौ चक्रगदापाणि: पीतवासा जनार्दन:।
हरिर्नारायण: श्रीमान् शरणं तं प्रपद्यथ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"तुम सब लोग उन परमेश्वर की शरण में जाओ, जिनके हाथ चक्र और गदा से सुशोभित हैं, जो पीत वस्त्र धारण करते हैं, जो जनार्दन और हरि नाम से प्रसिद्ध हैं, तथा जो श्रीमन नारायण नाम से विख्यात हैं।" ॥30॥
 
"All of you should seek refuge in that Supreme Lord, whose hands are adorned with the discus and the mace, who wears yellow clothes, who is known as Janardan and Hari, and who is renowned by the name of Shriman Narayan." ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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