श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.6.29 
अवध्या मम ते देवा: सुकेशतनया रणे।
मन्त्रं तु व: प्रदास्यामि यस्तान् वै निहनिष्यति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! सुकेश के पुत्र युद्धभूमि में मेरे हाथों मारे जाने योग्य नहीं हैं, किन्तु मैं तुम्हें ऐसे पुरुष के पास जाने की सलाह दूँगा जो निश्चय ही उन सबको मार डालेगा।
 
O gods! The sons of Sukesha are not worthy of being killed by my hands on the battlefield, but I will advise you to go to such a man who will surely kill them all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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