श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.6.28 
इत्येवं त्रिदशैरुक्तो निशम्यान्धकसूदन:।
शिर: करं च धुन्वान इदं वचनमब्रवीत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के ऐसा कहने पर अंधकार के शत्रु भगवान शिव ने सिर और हाथ हिलाकर अपनी असहमति प्रकट की और इस प्रकार कहा-॥28॥
 
When the gods said this, Lord Shiva, the enemy of darkness, shook his head and hands to indicate disapproval and said this -॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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