श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.6.24 
अमरा ऋषयश्चैव संगम्य किल शङ्करम्।
अस्मद्वधं परीप्सन्त इदं वचनमब्रुवन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'ऐसा सुना गया है कि देवता और ऋषिगण मिलकर हमारा वध करना चाहते हैं। इसके लिए वे भगवान शंकर के पास गए और उनसे यह बात कही॥ 24॥
 
‘It has been heard that the Gods and the sages together want to kill us. For this they went to Lord Shankar and told him this.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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