श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.6.23 
विबुधानां समुद्योगं माल्यवांस्तु निशाचर:।
श्रुत्वा तौ भ्रातरौ वीराविदं वचनमब्रवीत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के इस कृत्य का समाचार सुनकर निशाकर माल्यवान ने अपने दोनों वीर भाइयों से इस प्रकार कहा- 23॥
 
Hearing the news of this action of the gods, Nishakar Malyavan said to his two brave brothers thus - 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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