| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना » श्लोक 2-3 |
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| | | | श्लोक 7.6.2-3  | जगत्सृष्टॺन्तकर्तारमजमव्यक्तरूपिणम्।
आधारं सर्वलोकानामाराध्यं परमं गुरुम्॥ २॥
ते समेत्य तु कामारिं त्रिपुरारिं त्रिलोचनम्।
ऊचु: प्राञ्जलयो देवा भयगद्गदभाषिण:॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | जगत् के रचयिता और संहारकर्ता, अजन्मा, अव्यक्त स्वरूप, सम्पूर्ण जगत् के आधार, पूज्य देवता और परम गुरु, वे सभी देवता काम का नाश करने वाले, त्रिपुराओं का नाश करने वाले, तीन नेत्रों वाले भगवान शिव के पास गए और भयभीत होकर हाथ जोड़कर गद्गद्वाणी में बोले-॥2-3॥ | | | | The creator and destroyer of the world, the unborn, the unmanifested form, the support of the entire world, the worshipable deity and the ultimate Guru, all those deities went to Lord Shiva, the destroyer of lust, the destroyer of tripuras, the possessor of three eyes, and with folded hands said in Gadgadvaani with fear – ॥ 2-3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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