श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.6.16 
स त्वमस्मद्धितार्थाय जहि तान् मधुसूदन।
शरणं त्वां वयं प्राप्ता गतिर्भव सुरेश्वर॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! हमारे हित के लिए आप उन राक्षसों का संहार कीजिए। देवेश्वर! हम आपकी शरण में आए हैं। आप हमारी रक्षा कीजिए॥16॥
 
‘Madhusudana! For our benefit, please kill those demons. Deveshwar! We have come to your refuge. Please be our protector.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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