श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 58: ययाति को शुक्राचार्य का शाप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.58.2 
महदद्भुतमाश्चर्यं विदेहस्य पुरातनम्।
निर्वृत्तं राजशार्दूल वसिष्ठस्य मुनेश्च ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ! राजा विदेह (निमि) और वशिष्ठ मुनिक की प्राचीन कथा बड़ी अद्भुत और आश्चर्यजनक है। 2॥
 
Nrupashrestha! The ancient story of King Videha (Nimi) and Vashishtha Munika is very amazing and surprising. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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