श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.57.3 
तस्य तद् भाषितं श्रुत्वा राम: सत्यपराक्रम:।
तां कथां कथयामास वसिष्ठस्य महात्मन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उनका यह प्रश्न सुनकर महाबली श्री राम ने पुनः महात्मा वशिष्ठ के पाणिग्रहण सम्बन्धी कथा कहना प्रारम्भ किया-॥3॥
 
Hearing this question of his, the mighty Shri Ram again started telling the story related to the eclipse of Mahatma Vashishtha -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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