निक्षिप्तदेहौ काकुत्स्थ कथं तौ द्विजपार्थिवौ।
पुनर्देहेन संयोगं जग्मतुर्देवसम्मतौ॥ २॥
अनुवाद
ककुत्स्थ! देवताओं द्वारा भी पूजित ब्रह्मर्षि वशिष्ठ और राजर्षि निमि ने अपने-अपने शरीर को त्यागकर किस प्रकार नवीन शरीर धारण किया?' 2॥
Kakutstha! How did Brahmarshi Vashishtha and Rajarshi Nimi, who were respected even by the gods, leave their respective bodies and unite with the new body?' 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥