Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.56.20: "प्रभु! आपकी जैसी इच्छा हो, वैसा ही हो। मेरा हृदय आपसे विशेष रूप से प्रेम करता है और आप भी मुझसे बहुत प्रेम करते हैं; अतः मेरे निमित्त उस पात्र में वीर्य डाल दीजिए। यह शरीर अब मेरे मित्र ने धारण कर लिया है।" | ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"प्रभु! आपकी जैसी इच्छा हो, वैसा ही हो। मेरा हृदय आपसे विशेष रूप से प्रेम करता है और आप भी मुझसे बहुत प्रेम करते हैं; अतः मेरे निमित्त उस पात्र में वीर्य डाल दीजिए। यह शरीर अब मेरे मित्र ने धारण कर लिया है।"
‘Prabhu! Let it be as per your wish. My heart is particularly fond of you and you too are very fond of me; therefore, for my sake, please inject semen into that pot. This body has now been taken over by my friend.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥