श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.55.4 
आसीद् राजा निमिर्नाम इक्ष्वाकूणां महात्मनाम्।
पुत्रो द्वादशमो वीर्ये धर्मे च परिनिष्ठित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानन्दन! महात्मा इक्ष्वाकु के पुत्रों में निमि नाम के एक राजा हुए, जो इक्ष्वाकु के बारहवें पुत्र थे। वे वीरता और धर्म में पूर्णतया दृढ़ थे। 4॥
 
Sumitranandan! Among the sons of Mahatma Ikshvaku, there was a king named Nimi, who was the twelfth* son of Ikshvaku. He was completely steadfast in valor and religion. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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