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ramayan 7.55.2: श्री राम के ऐसा कहने पर सुमित्रापुत्र ने पुनः कहा - 'हे पुरुषों! इन आश्चर्यजनक कथाओं को सुनकर मैं कभी संतुष्ट नहीं होता।'   |   ramayan सर्ग 7.55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.55.2 
एवमुक्तस्तु रामेण सौमित्रि: पुनरब्रवीत्।
तृप्तिराश्चर्यभूतानां कथानां नास्ति मे नृप॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के ऐसा कहने पर सुमित्रापुत्र ने पुनः कहा - 'हे पुरुषों! इन आश्चर्यजनक कथाओं को सुनकर मैं कभी संतुष्ट नहीं होता।'
 
On Shri Ram saying this, Sumitra's son again said - 'Lord of men! I am never satisfied by listening to these astonishing stories.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)