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श्लोक 7.55.17  |
यस्मात् त्वमन्यं वृतवान् मामवज्ञाय पार्थिव।
चेतनेन विनाभूतो देहस्ते पार्थिवैष्यति॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| हे भूपाल नीमे! तुमने मेरी उपेक्षा करके दूसरे पुरोहित को चुना है, इसलिए तुम्हारा यह शरीर अचेत हो जाएगा॥17॥ |
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| O Bhupal Nime! You have ignored me and chosen another priest, therefore this body of yours will fall unconscious.'॥ 17॥ |
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