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ramayan 7.55.13-14h: उधर, इन्द्रयज्ञ के समाप्त होने पर अनंत भगवान वसिष्ठ होत्री का अनुष्ठान करने के लिए राजा निमिक के पास आए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि गौतम ने प्रतीक्षा का समय पूरा कर लिया है॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.55.13-14h 
इन्द्रयज्ञावसाने तु वसिष्ठो भगवानृषि:।
सकाशमागतो राज्ञो हौत्रं कर्तुमनिन्दित:॥ १३॥
तदन्तरमथापश्यद् गौतमेनाभिपूरितम्।
 
 
अनुवाद
उधर, इन्द्रयज्ञ के समाप्त होने पर अनंत भगवान वसिष्ठ होत्री का अनुष्ठान करने के लिए राजा निमिक के पास आए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि गौतम ने प्रतीक्षा का समय पूरा कर लिया है॥13 1/2॥
 
On the other hand, after the end of the Indrayagya, the infinite Lord Vasishtha came to King Nimik to perform the ritual of Hotri. On reaching there, he saw that Gautama had completed the time allotted for waiting.॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)