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ramayan 7.54.19: इस प्रकार रत्नों से विभूषित उस विशाल गड्ढे में प्रवेश करके महाबली राजा नृग ब्राह्मणों द्वारा क्रोधपूर्वक दिए गए शाप का फल भोगने लगे।॥19॥   |   ramayan सर्ग 7.54: राजा नृग का एक सुन्दर गड्ढा बनवाकर अपने पुत्र को राज्य दे स्वयं उसमें प्रवेश करके शाप भोगना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 54: राजा नृग का एक सुन्दर गड्ढा बनवाकर अपने पुत्र को राज्य दे स्वयं उसमें प्रवेश करके शाप भोगना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.54.19 
एवं प्रविश्येव नृपस्तदानीं
श्वभ्रं महद्रत्नविभूषितं तत्।
सम्पादयामास तदा महात्मा
शापं द्विजाभ्यां हि रुषा विमुक्तम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रत्नों से विभूषित उस विशाल गड्ढे में प्रवेश करके महाबली राजा नृग ब्राह्मणों द्वारा क्रोधपूर्वक दिए गए शाप का फल भोगने लगे।॥19॥
 
Having thus entered that huge pit adorned with gems, the great king Nriga began to suffer the consequences of the curse given to him by the Brahmins in anger.'॥ 19॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे चतु:पञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौवनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)