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ramayan 7.54.15-16h: पुरुषप्रवर! मेरे लिए शोक न करें। पुत्र! जिसने मुझे आसक्त बनाकर संकट में डाला है, वह हमारा पुराना कर्म अनुकूल-प्रतिकूल फल देने में समर्थ है।॥ 15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.54: राजा नृग का एक सुन्दर गड्ढा बनवाकर अपने पुत्र को राज्य दे स्वयं उसमें प्रवेश करके शाप भोगना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 54: राजा नृग का एक सुन्दर गड्ढा बनवाकर अपने पुत्र को राज्य दे स्वयं उसमें प्रवेश करके शाप भोगना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.54.15-16h 
मा कृथास्त्वनुसंतापं मत्कृते हि नरर्षभ॥ १५॥
कृतान्त: कुशल: पुत्र येनास्मि व्यसनीकृत:।
 
 
अनुवाद
पुरुषप्रवर! मेरे लिए शोक न करें। पुत्र! जिसने मुझे आसक्त बनाकर संकट में डाला है, वह हमारा पुराना कर्म अनुकूल-प्रतिकूल फल देने में समर्थ है।॥ 15 1/2॥
 
Purushapravar! Do not grieve for me. Son! The one who made me addicted and put me in trouble, that old deed of ours is capable of giving favorable and unfavorable results.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)