एवं कृत्वा विधानं स संनिवेश्य वसुं तदा॥ १३॥
धर्मनित्य: प्रजा: पुत्र क्षत्रधर्मेण पालय।
अनुवाद
ऐसी व्यवस्था करके राजा ने राजकुमार वसु को सिंहासन पर बैठाया और उससे कहा - 'बेटा! तुम प्रतिदिन धर्मपूर्वक रहो और क्षत्रिय धर्म के अनुसार प्रजा का पालन करो।॥13 1/2॥
‘After making such arrangements, the king seated Prince Vasu on the throne and said to him, 'Son! You should remain virtuous every day and look after the subjects according to the Kshatriya Dharma.॥ 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥