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ramayan 7.53.6: जो राजा प्रतिदिन नगरवासियों के प्रति कर्तव्य का पालन नहीं करता, वह निःसंदेह भयंकर नरक में पड़ता है, जो सब ओर से छिद्ररहित है और वायु-संचार से रहित है ॥6॥   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.53.6 
पौरकार्याणि यो राजा न करोति दिने दिने।
संवृते नरके घोरे पतितो नात्र संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो राजा प्रतिदिन नगरवासियों के प्रति कर्तव्य का पालन नहीं करता, वह निःसंदेह भयंकर नरक में पड़ता है, जो सब ओर से छिद्ररहित है और वायु-संचार से रहित है ॥6॥
 
A king who does not perform duties for the citizens of the city every day, undoubtedly falls into a terrible hell, which is hole-less from all sides and therefore devoid of ventilation. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)