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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.53.2 
दुर्लभस्त्वीदृशो बन्धुरस्मिन् काले विशेषत:।
यादृशस्त्वं महाबुद्धिर्मम सौम्य मनोऽनुग:॥ २॥
 
 
अनुवाद
सौम्या! तुम बहुत समझदार हो। तुम्हारे जैसा भाई मिलना मुश्किल है जो मेरे दिल की बात मानता हो, खासकर इस समय।
 
Soumya! You are very intelligent. It is difficult to find a brother like you who follows my heart, especially at this time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)