श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.53.11 
तत: कनखलं गत्वा जीर्णवत्सां निरामयाम्।
ददृशे तां स्विकां धेनुं ब्राह्मणस्य निवेशने॥ ११॥
 
 
अनुवाद
आखिरकार एक दिन कनखल पहुँचकर उसने अपनी गाय को एक ब्राह्मण के घर में पाया। वह स्वस्थ और बलवान थी, पर उसका बछड़ा बहुत बड़ा हो गया था।
 
‘At last, reaching Kankhal one day, he found his cow in a Brahmin's house. She was healthy and strong, but her calf had grown very big.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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