Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.52.19: हे कोमल लक्ष्मण! अब मैं शोक से मुक्त हो गया हूँ। मेरे हृदय का संताप दूर हो गया है और आपके सुन्दर वचनों ने मुझे महान शांति प्रदान की है।॥19॥ | ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कोमल लक्ष्मण! अब मैं शोक से मुक्त हो गया हूँ। मेरे हृदय का संताप दूर हो गया है और आपके सुन्दर वचनों ने मुझे महान शांति प्रदान की है।॥19॥
Gentle Lakshmana! Now I am free from sorrow. I have removed the anguish from my heart and your beautiful words have given me great peace.'॥ 19॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्विपञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बावनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ २॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥