Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.52.18: हे वीर पुरुषोत्तम लक्ष्मण! आपने जो कहा, वह बिलकुल सही है। मुझे बहुत संतोष है कि आपने मेरी आज्ञा का पालन किया।   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.52.18 
एवमेतन्नरश्रेष्ठ यथा वदसि लक्ष्मण।
परितोषश्च मे वीर मम कार्यानुशासने॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे वीर पुरुषोत्तम लक्ष्मण! आपने जो कहा, वह बिलकुल सही है। मुझे बहुत संतोष है कि आपने मेरी आज्ञा का पालन किया।
 
‘O bravest of men, Lakshman! It is exactly what you say. I am very satisfied that you obeyed my orders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)