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ramayan 7.52.16: अतः हे नरसिंह! धैर्य और एकाग्रता के साथ तू शोक के इस दुर्बल विचार को त्याग दे और व्याकुल न हो॥16॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.52.16 
स त्वं पुरुषशार्दूल धैर्येण सुसमाहित:।
त्यजेमां दुर्बलां बुद्धिं संतापं मा कुरुष्व ह॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः हे नरसिंह! धैर्य और एकाग्रता के साथ तू शोक के इस दुर्बल विचार को त्याग दे और व्याकुल न हो॥16॥
 
"Therefore, O lion of men, with patience and concentration, you should abandon this weak thought of grief and not be agitated."॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)