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ramayan 7.52.14: 'ऐसी परिस्थिति आने पर आप जैसे महापुरुष भ्रमित नहीं होते। रघुनन्दन! यदि आप दुःखी रहेंगे तो वह अपवाद पुनः आपके पास आ जाएगा।॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.52.14 
नेदृशेषु विमुह्यन्ति त्वद्विधा: पुरुषर्षभा:।
अपवाद: स किल ते पुनरेष्यति राघव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'ऐसी परिस्थिति आने पर आप जैसे महापुरुष भ्रमित नहीं होते। रघुनन्दन! यदि आप दुःखी रहेंगे तो वह अपवाद पुनः आपके पास आ जाएगा।॥14॥
 
‘A great person like you does not get confused when such situations arise. Raghunandan! If you remain sad then that exception will come back to you again.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)