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ramayan 7.52.12: अतः स्त्री, पुत्र, मित्र और धन में अधिक आसक्त नहीं होना चाहिए, क्योंकि इनसे वियोग निश्चित है॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.52.12 
तस्मात् पुत्रेषु दारेषु मित्रेषु च धनेषु च।
नातिप्रसङ्ग: कर्तव्यो विप्रयोगो हि तैर्ध्रुवम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अतः स्त्री, पुत्र, मित्र और धन में अधिक आसक्त नहीं होना चाहिए, क्योंकि इनसे वियोग निश्चित है॥12॥
 
‘Therefore one should not get too attached to wife, son, friend and wealth because separation from them is certain.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)