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श्लोक 7.52.11  |
सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छ्रया:।
संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| संसार में समस्त संचय का अंत नाश में होता है, उत्थान का अंत पतन में होता है, संयोग का अंत वियोग में होता है और जीवन का अंत मृत्यु में होता है॥11॥ |
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| All accumulations in the world end in destruction, rise ends in fall, union ends in separation and life ends in death.॥ 11॥ |
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