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ramayan 7.52.11: संसार में समस्त संचय का अंत नाश में होता है, उत्थान का अंत पतन में होता है, संयोग का अंत वियोग में होता है और जीवन का अंत मृत्यु में होता है॥11॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.52.11 
सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छ्रया:।
संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
संसार में समस्त संचय का अंत नाश में होता है, उत्थान का अंत पतन में होता है, संयोग का अंत वियोग में होता है और जीवन का अंत मृत्यु में होता है॥11॥
 
All accumulations in the world end in destruction, rise ends in fall, union ends in separation and life ends in death.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)