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ramayan 7.52.10: 'पुरुषसिंह! तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। काल का यही नियम है। तुम्हारे समान बुद्धिमान् पुरुष शोक नहीं करते।॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.52.10 
मा शुच: पुरुषव्याघ्र कालस्य गतिरीदृशी।
त्वद्विधा नहि शोचन्ति बुद्धिमन्तो मनस्विन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषसिंह! तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। काल का यही नियम है। तुम्हारे समान बुद्धिमान् पुरुष शोक नहीं करते।॥10॥
 
‘Purushasingh! You should not grieve. Such is the course of time. Wise and intelligent people like you do not grieve.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)