श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.51.8-9h 
भगवन् किंप्रमाणेन मम वंशो भविष्यति॥ ८॥
किमायुश्च हि मे राम: पुत्राश्चान्ये किमायुष:।
 
 
अनुवाद
'प्रभो! मेरा वंश कब तक चलेगा? मेरे राम कब तक जीवित रहेंगे और मेरे अन्य पुत्र कब तक जीवित रहेंगे?॥ 8 1/2॥
 
‘Lord! How long will my dynasty last? How long will my Rama live and how long will all my other sons live?॥ 8 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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