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श्लोक 7.51.1  |
तथा संचोदित: सूतो लक्ष्मणेन महात्मना।
तद् वाक्यमृषिणा प्रोक्तं व्याहर्तुमुपचक्रमे॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| तब महात्मा लक्ष्मण की प्रेरणा से सुमन्तराम ने उन्हें दुर्वासा की कही हुई बातें सुनानी आरम्भ कीं-॥1॥ |
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| Then, inspired by Mahatma Lakshmana, Sumantram began to narrate to him what Durvasa had said -॥ 1॥ |
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