श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.51.1 
तथा संचोदित: सूतो लक्ष्मणेन महात्मना।
तद् वाक्यमृषिणा प्रोक्तं व्याहर्तुमुपचक्रमे॥ १॥
 
 
अनुवाद
तब महात्मा लक्ष्मण की प्रेरणा से सुमन्तराम ने उन्हें दुर्वासा की कही हुई बातें सुनानी आरम्भ कीं-॥1॥
 
Then, inspired by Mahatma Lakshmana, Sumantram began to narrate to him what Durvasa had said -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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