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ramayan 7.50.18-19: यद्यपि पूर्वकाल में महाराज ने यह रहस्य दूसरों को न बताने की आज्ञा दी थी, तथापि आज मैं इसे बताता हूँ। भगवान् के विधान का उल्लंघन करना बड़ा कठिन है; इसी कारण यह दुःख और शोक आया है। भैया! तुम भी भरत और शत्रुघ्न के सामने यह बात न कहना।॥18-19॥   |   ramayan सर्ग 7.50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  7.50.18-19 
यद्यप्यहं नरेन्द्रेण रहस्यं श्रावितं पुरा।
तथाप्युदाहरिष्यामि दैवं हि दुरतिक्रमम्॥ १८॥
येनेदमीदृशं प्राप्तं दु:खं शोकसमन्वितम्।
न त्वया भरतस्याग्रे शत्रुघ्नस्यापि संनिधौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि पूर्वकाल में महाराज ने यह रहस्य दूसरों को न बताने की आज्ञा दी थी, तथापि आज मैं इसे बताता हूँ। भगवान् के विधान का उल्लंघन करना बड़ा कठिन है; इसी कारण यह दुःख और शोक आया है। भैया! तुम भी भरत और शत्रुघ्न के सामने यह बात न कहना।॥18-19॥
 
‘Although in the past Maharaja had ordered not to reveal this secret to others, yet today I will tell it. It is very difficult to transgress the law of God; due to which this sorrow and grief has come. Brother! You should also not tell this in front of Bharat and Shatrughna.’॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)