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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.50.10 
न संतापस्त्वया कार्य: सौमित्रे मैथिलीं प्रति।
दृष्टमेतत् पुरा विप्रै: पितुस्ते लक्ष्मणाग्रत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! आपको मिथिला की पुत्री सीता के लिए दुःखी नहीं होना चाहिए। लक्ष्मण! ब्राह्मणों को आपके पिता के सामने ही यह बात पता चल गई थी।
 
‘Sumitra Nandan! You should not be upset about Mithila's daughter Sita. Lakshman! The Brahmins had come to know about this in front of your father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)