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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 5: सुकेश के पुत्र माल्यवान्, सुमाली और माली की संतानों का वर्णन
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श्लोक 39
श्लोक
7.5.39
सुमाली जनयामास यदपत्यं निशाचर:।
केतुमत्यां महाराज तन्निबोधानुपूर्वश:॥ ३९॥
अनुवाद
महाराज! केतुमती के गर्भ से दैत्य सुमाली के जो बालक उत्पन्न हुए हैं, उनका भी क्रमशः परिचय दिया जा रहा है। कृपया सुनिए॥39॥
Maharaj! The children born to the demon Sumali from the womb of Ketumati are also being introduced step by step. Please listen. ॥ 39॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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